आपको रोग हुआ तो आप क्या करते हैं ?

 Article by Dr. Manas Rajrishi 

(Naturopath, Yoga Therapist, International Chakra & Meditation Teacher, Global Writer) — World Record Holder (2018), Yoga Ambassador National Award (2003), Yoga Grandmaster Award (2024).

आपको और आपके पडोसी को  डेंगू, चिकनगुनिया  मलेरिया या टाईफाइड बुखार हुआ तो आप क्या करते है ?

तुरंत उस डॉक्टर के पास जाते हैं,  जिसके पास इसके ज्यादा मरीज हैं । डॉक्टर आपके खून की जांच करता है और प्लेटलेड्स को मुख्य आधार मानकर आपको बताता है की लगातार कितने समय तक  आपको बोतल चढ़नी है । एलोपैथी विज्ञान के अनुसार इस प्रकार के फीवर की ड्यूरेशन 5 दिन तक मानी जाती है । एक दिन में कम से कम आप 1000 से 30000 तक खर्च करते हैं । अगर आपकी जानकारी में बढ़िया फेसिलिटी वाला प्राइवेट हॉस्पिटल है तो प्रतिदिन का खर्च 11-12 हजार भी हो सकता है । एक  अनुभवी  नैचुरोपैथ ने कहा कि वह प्रतिदिन 600 के खर्च में  रोगी को 3 दिन में दौड़ा देगा । आपने सोचा यह कैसे  🤔 ? इसके पास हमारे  एलोपैथी वाले डॉक्टर की तरह भीड़ नहीं , यह नहीं हो सकता ।
 आप नहीं गए और 5 दिन का एलोपैथी डॉक्टर वाला  कोर्स चुना । आपने देखा कि पडोसी नैचुरोपथी का इलाज ले रहा 😳 , आपने सोचा कितना मुर्ख है । पडोसी 3 दिन बाद आपको अपना काम मजे से करते दिख रहा और आप हैं कि  अभी तक ठीक से उठ भी नहीं पा रहे । 5 दिन में डॉक्टर ने आपको छोड़ दिया लेकिन वीकनेस के कारण आप अपने कार्य सही तरीके से नहीं कर सकते । पडोसी दौड़ रहा और घर की डाल, रोटी , चावल और सब्जी खा रहा । 

आप क्या खा रहे ? दवाओं के साथ डॉक्टर द्वारा बताये गए विटामिन और प्रोटीन के मंहगे डिब्बे । 

कौन ज्यादा समझदार है ❓

आपको  घुटने की पीड़ा 1 साल से बढ़ रही, आपने एक नामी डॉक्टर को दिखाया , डॉक्टर ने क्या किया ?

डॉक्टर ने आपके घुटने की जाँच करायी तो डॉक्टर ने कहा कि लुब्रिकेशन सूख  रहा है , उसने दवाइयां लिख दी और कहा आप इसका 6 माह का कोर्स करें सब ठीक हो जायेगा । आपने 6 माह पूरे किये आपको लगा सब ठीक है और सामान्य  जीवन जीने लगे । 15 दिन में फिर पीड़ा हुई , डॉक्टर के पास गए , डॉक्टर ने कहा यह नहीं होना चाहिए । अच्छा  ऐसा करिए इस बार मेडिसिन चेंज कर रहा हूँ , सिर्फ 3 माह के कोर्स में घुटने ठीक हो जायेंगें । आपने वह भी किया , 3 माह बाद आपको लगा कि सब ठीक है लेकिन फिर 15 दिन बाद और अधिक पीड़ा । आप फिर डॉक्टर के पास गए , डॉक्टर ने बनावटी चिंता की और कहा कि एक पेटेंट मेडिसिन आयी है सिर्फ डेढ़ माह का कोर्स है । आपने वह भी लिया , डेढ़ माह में लगा कि अब सब ठीक है , लेकिन फिर 15 दिन बाद पुनः जरुरत से ज्यादा पीड़ा और घुटने जाम । आप फिर किसी का सहारा लेकर पंहुचे , डॉक्टर ने आपकी जाच करायी और कहा कि आपके घर के पानी या खाने में कोई लापरवाही के कारण मेडिसिन ने पूरा असर नहीं दिखाया । अब एक ही विकल्प है कि आप इसका ओपरेशन कराएँ । डॉक्टर ने आपको डरा  कर बताया कि ओपरेशन क्यों जरुरी है और यह भी बताया कि दुनिया में यह ओपरेशन बहुत मंहगा है सिर्फ उसी के पास ऐसी जगह की जानकारी है जहाँ 3 लाख का काम डेढ़ लाख में हो सकता है । अब आप क्या करेंगें यह आपका विषय है ,

लेकिन आपके पडोसी को भी घुटनों में पीड़ा हुई । उसे नैचुरोपैथी पर विश्वास हो गया , वह अपने अनुभवी  नैचुरोपैथ डॉक्टर के पास गया , उसने 7 दिन जानूवस्ति की और साथ में कुछ अन्य नैचुरोपैथी ट्रीटमेंट लिए  , नैचुरोपैथ डॉक्टर ने  उसे एक बेहतर डायट प्लान और कुछ योग बताये , वह फिट होकर चल-फिर रहा और आप  एक छड़ी के सहारे जीवन गुजार रहे ।  एक साल बाद उसने   बताये हुए अनुभवी  नैचुरोपैथ के अनुसार वह उनके पास गया और फिर सात दिन का ट्रीटमेंट लिया और वह चल फिर रहा ।  

उसने 3 साल में कुल खर्च किये लगभग 25 हजार और वह चल-फिर और जरुरत पड़ने पर दौड़ रहा , दूसरी तरफ आप मेडिसिन + ऑपरेशन  = लगभग 3 लाख खर्च करने के बाद भी पीड़ा से चल रहें ।  

किसका डिसीजन बेहतर था ❓


अब आपको और पडोसी दोनों  की किडनी में पथरी हो गयी , आप डॉक्टर के पास गए और वह अपने नैचुरोपैथ के पास, आपके डॉक्टर ने क्या किया ?

उसने अल्ट्रासाउंड निकाला , LFT, KFT , हार्ट की जाँच और भी उसे जो समझ में आया डॉक्टर ने  वो जांच लिख दी और आपको जांच तक पीड़ा से मुक्त रहने के लिए एड्मिड कर लिया , सभी जाँच के बाद आपका ऑपरेशन  हुआ एक लम्बा चीरा लगा । और आप रिकवरी तक हॉस्पिटल में पड़े रहे , यह लम्बा खर्च था , परिवार ने मज़बूरी से व्यवस्था बनाई ।  आप घर आ गए और अपने लम्बे निशान के साथ डॉक्टर के अनेकों मेडिसिन, विटामिन्स और प्रोटीन पाउडर के साथ जीवन  गुजारने  लगे । 

आपके पडोसी ने अपने अनुभवी नैचुरोपैथ को दिखाया , उसने अल्ट्रासाउंड देखा और आपकी शुद्धिक्रिया की और विरेचन किया ।  विरेचन के 10 दिन बाद उसको   फिर से जांच कराना था , उसने  जाँच कराया और पथरी गायब थी । जीवन में  न विटामिन्स, न  प्रोटीन पाउडर, न कोई मेडिसिन  ।  वह स्वस्थ है मस्त है और आप ❓🤔

क्या कारण हो सकता है कि दोनों में अंतर है ❓

या तो आप गैर जागरूक हैं या आप बेईमानी का धन अर्जित कर रहे हैं । 

जो गैर जागरूक होता है उसका विवेक काम नहीं करता , विषम परिस्थिति के समय वह वही रास्ता चुनता है जिसे  दुनिया के अधिकांश लोग चुन रहे हैं । 

जो बेईमानी से अधिक  धन कमाता है उसको मंहगी सुविधाएँ और ब्रांडेड  वस्तु  में ही सबसे बढ़िया क्वालिटी दिखती है , उसे जमीन में पेड़ से गिरे देशी आम में विषाणु होने का डर रहता है इसलिए वह आम भी मार्किट जाकर मंहगे वाले खरीदता है । 

आवश्यक नहीं कि शारीरिक और मानसिक समस्याओं में आपको हर मार्केट  में एक नैचुरोपैथ मिल जाये , हर जगह  ये कम मिलते हैं और यदि होते हैं मेरी तरह किसी विवेकहीन  लोगों की सोसाइटी के बीच होते हैं , जिनके पास अमेरिका , मुंबई और दिल्ली से इन्याक्वाइरी और  पेशेंट तो होते हैं लेकिन उनके  क्षेत्र में सिर्फ निंदक होते हैं

आप,  कैसे जीवन मे नैचुरोपैथी के साथ चल सकते हैं ?

आपको खुद सीखना होगा

आपको यह सीखना इतना आसान  नहीं किन्तु आप चाहें तो यह सीख सकते हैं ।  सप्ताह में सिर्फ दो दिन की क्लासे 6 माह तक, फिर 6 माह अवकाश के बाद पुनः 6 माह सप्ताह में 2 दिन क्लासें, इसी प्रकार 3 वर्ष तक सभी प्रक्टिकल  और थ्योरी के साथ आप बहुत सब कुछ  सीख सकते हैं और खुद को, अपने परिवार को और समाज को जीने की एक नवीन दिशा दे सकते हैं । 

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